· ahmad · Finance · 4 min read
शेयर की असली कीमत (Intrinsic Value) कैसे निकालें? DCF Valuation Method 2026
DCF (Discounted Cash Flow) Valuation Method का इस्तेमाल करके किसी भी कंपनी के शेयर की सही कीमत (Intrinsic Value) का पता लगाना सीखें। यह गाइड आपको फ्यूचर कैश फ्लो, प्रेजेंट वैल्यू और टर्मिनल वैल्यू की गणना करने में मदद करेगी।

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एक अच्छा इन्वेस्टमेंट वही है जिसके लिए आप सही कीमत दें, यानी आपको वह शेयर एक सस्ती कीमत पर मिले। कई बार एक बहुत अच्छी कंपनी का शेयर भी अगर महंगा खरीदा जाए तो वह एक बुरा इन्वेस्टमेंट बन जाता है।
इसीलिए, किसी भी कंपनी में निवेश करने से पहले उसके शेयर की सही कीमत यानी Intrinsic Value का पता लगाना बहुत ज़रूरी है। इसके लिए सबसे भरोसेमंद तरीकों में से एक है Discounted Cash Flow (DCF) Method of Valuation.
इस आर्टिकल में हम DCF मेथड को स्टेप-बाय-स्टेप सीखेंगे।
DCF Valuation क्या है?
DCF एक वैल्यूएशन मेथड है जिसमें किसी कंपनी के भविष्य में होने वाले कैश फ्लो (Cash Flow) को आज की तारीख में डिस्काउंट करके उसकी असली कीमत का अंदाज़ा लगाया जाता है।
सीधे शब्दों में कहें तो, हम यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि एक कंपनी अपनी पूरी लाइफ (Lifetime) में कुल कितना कैश कमाएगी, और उस कमाई की आज के समय में क्या वैल्यू है।
टाइम वैल्यू ऑफ मनी (Time Value of Money)
DCF मेथड को समझने से पहले “टाइम वैल्यू ऑफ मनी” के कॉन्सेप्ट को समझना ज़रूरी है। इसका मतलब है कि आज के ₹100 की कीमत भविष्य के ₹100 से ज़्यादा है।
ऐसा इसलिए है क्योंकि आज के ₹100 को अगर कहीं निवेश कर दिया जाए, तो वह भविष्य में ब्याज कमाकर ₹100 से ज़्यादा हो जाएगा। इसी कॉन्सेप्ट का इस्तेमाल करके हम भविष्य के कैश की आज की कीमत निकालते हैं।
- फ्यूचर वैल्यू (Future Value - FV): आज के पैसे की भविष्य में क्या कीमत होगी।
- प्रेजेंट वैल्यू (Present Value - PV): भविष्य में मिलने वाले पैसे की आज क्या कीमत है।
DCF एनालिसिस में हम प्रेजेंट वैल्यू (PV) का इस्तेमाल करते हैं।
PV का फॉर्मूला: PV = फ्यूचर वैल्यू / (1 + डिस्काउंट रेट) ^ सालों की संख्या
उदाहरण: अगर डिस्काउंट रेट 10% है, तो आज से 5 साल बाद मिलने वाले ₹10,000 की आज की कीमत होगी: PV = 10,000 / (1 + 10%) ^ 5 = ₹6,209
DCF मॉडल कैसे काम करता है?
DCF मॉडल में हम मुख्य रूप से 5 स्टेप्स फॉलो करते हैं:
स्टेप 1: फ्री कैश फ्लो (Free Cash Flow - FCF) का अनुमान लगाएं
फ्री कैश फ्लो वह कैश होता है जो एक कंपनी अपने सारे खर्चे (जैसे सैलरी, किराया, नया निवेश) निकालने के बाद बचाती है। यह वह पैसा है जो कंपनी अपने शेयरहोल्डर्स को दे सकती है।
FCF का फॉर्मूला: FCF = कारोबार से मिला कैश (Cash from Operations) – कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure)
हम पिछले 5-10 सालों के FCF को देखकर भविष्य के FCF का अनुमान लगाते हैं।
स्टेप 2: ग्रोथ रेट (Growth Rate) तय करें
अब हमें यह अनुमान लगाना होगा कि कंपनी का फ्री कैश फ्लो भविष्य में किस रफ़्तार से बढ़ेगा। आमतौर पर, हम इसे दो भागों में बांटते हैं:
- High Growth Phase (अगले 5-10 साल): इसमें हम कंपनी की मौजूदा ग्रोथ के हिसाब से एक रियलिस्टिक ग्रोथ रेट (जैसे 7-10%) तय करते हैं।
- Terminal Growth Phase (10 साल के बाद): 10 साल के बाद, हम यह मान लेते हैं कि कंपनी देश की GDP ग्रोथ रेट (जैसे 2-4%) से ही बढ़ेगी।
स्टेप 3: टर्मिनल वैल्यू (Terminal Value) की गणना करें
टर्मिनल वैल्यू का मतलब है 10 साल के बाद से लेकर कंपनी के जीवनकाल के अंत तक के कुल कैश फ्लो की कीमत।
टर्मिनल वैल्यू का फॉर्मूला: TV = (10वें साल का FCF * (1 + टर्मिनल ग्रोथ रेट)) / (डिस्काउंट रेट – टर्मिनल ग्रोथ रेट)
स्टेप 4: सभी फ्यूचर कैश फ्लो की प्रेजेंट वैल्यू (PV) निकालें
अब हम अगले 10 सालों के एस्टीमेटेड (Estimated) FCF और टर्मिनल वैल्यू, इन दोनों को डिस्काउंट करके इनकी प्रेजेंट वैल्यू (PV) निकालते हैं।
इन सभी प्रेजेंट वैल्यू को जोड़ने पर हमें कंपनी के कैश फ्लो की कुल कीमत (Total Present Value) मिल जाती है।
स्टेप 5: प्रति शेयर इंट्रिन्सिक वैल्यू (Intrinsic Value Per Share) निकालें
अंत में, हम कंपनी की असली कीमत निकालने के लिए यह फॉर्मूला इस्तेमाल करते हैं:
- Enterprise Value = कुल प्रेजेंट वैल्यू
- Equity Value = Enterprise Value - कुल कर्ज़ + कैश
- Intrinsic Value Per Share = Equity Value / कुल शेयरों की संख्या
निष्कर्ष: क्या शेयर खरीदें?
अब आपके पास कंपनी की इंट्रिन्सिक वैल्यू है। इसकी तुलना शेयर की मौजूदा बाज़ार कीमत (Current Market Price) से करें:
- अगर मार्केट प्राइस < इंट्रिन्सिक वैल्यू: इसका मतलब है कि शेयर अपनी असली कीमत से सस्ता (Undervalued) मिल रहा है। यह खरीदने का अच्छा मौका हो सकता है।
- अगर मार्केट प्राइस > इंट्रिन्सिक वैल्यू: इसका मतलब है कि शेयर महंगा (Overvalued) है। ऐसे में या तो इंतज़ार करें या किसी और शेयर की तलाश करें।
DCF मॉडल में बहुत सारे अनुमान शामिल होते हैं, इसलिए हमेशा मार्जिन ऑफ सेफ्टी (Margin of Safety) लेकर चलना चाहिए, यानी इंट्रिन्सिक वैल्यू से भी 15-20% कम कीमत पर खरीदने का लक्ष्य रखें।
उम्मीद है यह गाइड आपको DCF मेथड को समझने में मदद करेगी। अगर आपका कोई सवाल है, तो नीचे कमेंट्स में पूछें।






